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बुधवार, 11 अप्रैल 2007

एक मंच की जरूरत

अहमदाबाद मे हिंदी भाषियों की कमी नही है। इसके बावजूद यह एक हक़ीकत है कि अहमदाबाद में हिंदी का माहौल नही है। जब अहमदाबाद की यह हालत है ,तब हम राज्य के अन्य शहरों और नगरों के बारे में कल्पना कर सकते हैं।

चौपाल के दस वर्षों के अनुभव के आधार पर मैं यह हक़ीकत आछी तरह से जानता हूँ । आज जब ऑनलाइन अभिव्यक्ति कि सुविधा है , तब मैं गुजरात में हिंदी में अभिव्यक्ति का यह एक नया प्रयास शुरू कर रह हूं । इसका आशय हैं हिंदी में अभिव्यक्ति का एक मंच उपलब्ध कराना।

प्रारम्भ में मेरा विचार लोगों की अभिव्यक्ति को एक मंच उपलब्ध कराना हैं। आज अहमदाबाद में हिंदी सीखने और उसे अच्छा बनने के लिए कोई योग्य मार्गदर्शन का कोई साधन नही है। अभिव्यक्ति का उद्देश्य इस प्रकार का मार्गदर्शन उपलब्ध कराना और हिंदी साहित्य की जानकारी देना भी है।

यह शुरुआत है। आप् लोगों के रस से इसे अभिव्यक्ति का इन्द्रधनुष बनाना है। इसी कामना के साथ पेश है अभिव्यक्ति की ये चौपाल।

आपका योगेश शर्मा

1 टिप्पणी:

ePandit ने कहा…

आपकी पहल के लिए शुभकामनाएं! वैसे प्रसिद्ध हिन्दी प्रेमी चिट्ठाकार बेंगाणी बंधु भी अहमदाबाद से ही हैं।

संजय बेंगाणी: http://www.tarakash.com/joglikhi/

पंकज बेंगाणी: http://www.tarakash.com/mantavya/

ही हैं।

संजय बेंगाणी: http://www.tarakash.com/joglikhi/

तरकश:
http://tarakash.com

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